World Tribal Day 2023: आदिवासी दिवस क्‍यों मनाया जाता है

आदिवासी दिवस एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव है जो प्रति वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। यह उत्सव भारत के आदिवासी समुदायों के संरचनात्मक धरोहर, संस्कृति और जीवनशैली को समझने और मानने का एक अवसर प्रदान करता है। इस लेख में, हम देखेंगे कि आदिवासी दिवस को क्‍यों महत्वपूर्ण माना जाता है और इसका महत्व क्या है।

1. आदिवासी समृद्धि का प्रतीक:

आदिवासी समुदायें भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी आवाज, संगीत, नृत्य, और कला में विविधता दिखती है जिससे हमें अपने देश की समृद्धि का एक अद्वितीय पहलू मिलता है। आदिवासी दिवस इस समृद्धि और विविधता को समर्पित है और हमें याद दिलाता है कि हमारे समाज में विभिन्न सांस्कृतिक धरोहरों का सम्मान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

2. सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्व:

आदिवासी दिवस का आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जाता है। इस दिन स्थानीय संगीत, नृत्य, और कला को प्रस्तुत किया जाता है, जो आदिवासी समुदायों की अमूल्य धरोहर का प्रतीक होता है। यह उत्सव भारतीय समृद्धि में विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि के महत्व को दर्शाता है और हमें यह सिखाता है कि हमें अपने रूझानों की सम्मान करनी चाहिए।

3. समाज में समरसता बढ़ाने का प्रयास:

आदिवासी दिवस का उद्देश्य समाज में समरसता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना भी है। यह एक ऐसा मौका प्रदान करता है जब लोग आपसी समझ और सहयोग की महत्वपूर्णता को समझते हैं और समाज में विभिन्न समुदायों के बीच सामंजस्य रिश्तों को मजबूती से बढ़ावा देते हैं।

भारत में आदिवासी समुदाय की बड़ी संख्या

भारत में विभिन्न राज्यों में आदिवासी समुदाय के लोग विशेष तौर पर मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार आदि में बसे हैं। मध्य प्रदेश में 46 आदिवासी जनजातियाँ आवास करती हैं और यहाँ की कुल जनसंख्या के 21 फीसदी आदिवासी समुदाय से संबंधित है। इसी तरह, झारखंड में आबादी के लगभग 28 फीसदी आदिवासी समुदाय से जुड़ी है। और यहाँ के अलावा भारत के अन्य राज्यों में भी आदिवासी समुदाय के लोग बासे हैं।

मध्य प्रदेश में गोंड, भील, ओरोन, कोरकू, सहरिया और बैगा जनजातियाँ मुख्यतः प्रमुख हैं। गोंड समुदाय एशिया के सबसे बड़े आदिवासी समूह में शामिल है, जिनकी संख्या 30 लाख से अधिक है। इनके अलावा, गोंड समुदाय के लोग महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी निवास करते हैं। संथाल, बंजारा, बिहोर, चेरो, हो, खोंड, लोहरा, माई पहरिया, मुंडा, और ओरांव आदि भी अन्य आदिवासी समूह हैं जो भारत के विभिन्न हिस्सों में बसे हैं।

निष्कर्ष:

आदिवासी दिवस एक महत्वपूर्ण उत्सव है जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को मानवता के साथ जोड़ता है। इस दिन का उद्देश्य आदिवासी समुदायों

FAQ

 Q1: आदिवासी दिवस क्या होता है?

उत्तर: आदिवासी दिवस एक महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक उत्सव है जो भारत में मनाया जाता है ताकि समृद्धि, समानता और आदिवासी समुदायों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता बढ़ाई जा सके। यह उत्सव वार्षिक रूप से 9 अगस्त को मनाया जाता है और यह भारतीय संविधान में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने आदिवासी समुदायों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा की।

 Q2: आदिवासी दिवस क्यों मनाया जाता है?

उत्तर:आदिवासी दिवस का मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज में आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संरक्षण और समानता की दिशा में जागरूकता फैलाना है। यह एक अवसर है जब लोग सामाजिक और आर्थिक असमानता को समझने और इसे दूर करने के लिए संकल्प लेते हैं। इसके साथ ही, आदिवासी संस्कृति, परंपराएँ और उनके योगदान को मान्यता देने का भी मौका होता है।

Q 3: आदिवासी दिवस कैसे मनाया जाता है?

उत्तर: आदिवासी दिवस को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है, जैसे कि सरकारी कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रदर्शनियाँ, समारोह और सम्मान के आयोजन। शिक्षा संस्थानों में विशेष उपन्यास, कार्यशालाएँ और वाद-विवाद का आयोजन भी किया जाता है ताकि छात्रों को आदिवासी समुदायों के संरक्षण और उनके संरचनात्मक जीवन के प्रति जागरूक होने का अवसर मिले।

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